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सभी जनपदों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जल संपदा के संरक्षण, संभरण एवं जल संवर्द्धन के संबंध में बैठक ली।

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रंजीत सम्पदक

उन्होंने सभी संबंधित विभागों को संबोधित करते हुए संवेदनशील सूख रहे जल स्रोतों एवं सहायक नदियों, तालाबों, धाराओं आदि सभी जल स्रोतों को चिह्नीकरण कर योजना बनाने और उस पर कार्य करने के लिए निर्देशित किया ताकि सकारात्मक परिणाम मिल सकें। उन्होंने कहा कि पर्वतीय ग्रामों में जल स्रोत कम उपलब्ध होते हैं ऐसे क्षेत्रों में कंटूर ट्रेंचेंज व रिचार्ज पिट्स निर्मित किये जा सकते हैं तथा मैदानी ग्रामों में कच्चे तालाब, चैक डैम व रिचार्ज पिट्स के माध्यम से भू-जल को संरक्षित कर सकतें हैं। इसके साथ ही ग्रामों के समीप वन क्षेत्रों एवं चारागाही क्षेत्रों में चाल-खाल का निर्माण किया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस अभियान के लिए जनपद में संबंधित विभागों के आपसी सामंजस्य से काम करने हेतु नोडल अधिकारी बनायें और जनपद में विकासखण्ड स्तर पर नदी, धारा व जल स्त्रोतों को चिह्नित करने के लिए कहा

। उन्होंने कहा कि सभी जिलाधिकारियों को इस अभियान को प्राथमिकता से लेते हुए अगले तीन दिन में सारा(ैंतं) की जनपद स्तरीय कमेटी की बैठक करने व फीडबैक देने को कहा। उन्होंने बताया कि इस अभियान को 01 जुन से 07 जुन 2024 तक जल उत्सव सप्ताह के रूप में मनाया जायेगा। इस अभियान के लिए शैक्षिक संस्थानों द्वारा विभिन्न कार्यक्रम एवं जागरूकता रैली आदि भी आयोजित किये जाये।

उन्होंने कहा कि जल निगम, फॉरेस्ट, ग्राम्या द्वारा चिह्नित किये गये संवेदनशील जल स्त्रोतों को सभी जनपद अधिकारियों को साझा किया जा रहा है जिसकी वे समीक्षा करें व कहा कि वर्षा ऋतु में जल संरक्षण हेतु भी रूपरेखा बना लें ताकि समय से उन पर कार्य कर लिया जाये। उन्होंने पूरे राज्य में 8-10 नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए सभी जिलों से सुझाव मांगे व एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा।

जिलाधिकारी उदयराज सिंह ने अवगत कराया कि जनपद में जल स्रोतों को चिह्नित कर लिया गया है, ब्लॉक जसपुर व काशीपुर को संवेदनशील क्षेत्रों में सम्मिलित किया गया है व वहां की नदियो को कार्ययोजना के अन्तर्गत शामिल किया गया है, इसके साथ ही बड़े तालाबों के पुनर्जीवित करने तथा पुराने बांधों का नवीनीकरण करके जल संरक्षण को बढाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्य विकास अधिकारी, संभागीय वन सरंक्षक व सभी संबंधित विभागों के साथ आपसी समन्वय से एक सप्ताह में कार्य योजना बना कर कार्य करेंगे। उन्होंने वनों में नदी किनारे खाली स्थानों पर वृक्षारोपण करने और नदी किनारे स्थान उपलब्ध होने पर तालाब बनाने के निर्देश दिये साथ ही कहा कि नदी के आस पास जल सरंक्षण करते है तो उसे अतिरिक्त जल निकाय के रूप में रिजर्व रख सकते है।

बैठके में मुख्य विकास अधिकारी मनीष कुमार, डीएफओ यूसी तिवारी, एपीडी संगीता आर्या, मुख्य कृषि अधिकारी एके वर्मा, अधिशासी अभियन्ता लघु सिंचाई सुशील कुमार, अधिशासी अभियन्ता सिचांई पीसी पाण्डे, जल निगम ज्योति पालनी, जल संस्थान तरूण शर्मा आदि मौजूद थे।

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