रंजीत संपादक
रुद्रपुर। उड़ीसा राज्य के मलकानगिरी जिले में हाल ही में बंगाली समाज के लोगों के घरों में हुई आगजनी, लूट–पाट और हमले की घटनाओं को लेकर देशभर में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जनपद ऊधम सिंह नगर के बंगाली महासभा ने इस जघन्य घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे सोची-समझी साजिश करार दिया है। महासभा ने कहा कि आदिवासी समुदाय के एक वर्ग द्वारा योजनाबद्ध तरीके से निर्दोष परिवारों पर हमला किया गया, जो न केवल अमानवीय है बल्कि मानवाधिकारों का भी घोर उल्लंघन है।
महासभा के अध्यक्ष राजकुमार शाहा ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहां विभिन्न जाति और धर्मों के लोग सौहार्द के साथ रहते हैं, लेकिन मलकानगिरी में वर्षों से बसे बंगाली परिवारों के साथ जिस तरह का उत्पीड़न किया गया, उसने पूरे समुदाय में भय का वातावरण पैदा कर दिया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि कई परिवार अपने घरों में वापस जाने से डर रहे हैं क्योंकि हमलावरों ने उनके घरों को जलाने के साथ-साथ खाद्यान्न, अनाज और आवश्यक सामान तक लूट लिया है।किसी एक व्यक्ति की गलती का बदला पूरे समाज को निशाना बनाकर लेना अत्यंत निंदनीय है। ऐसी घटनाएँ सामुदायिक सौहार्द को आहत करती हैं और कानून व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। महासभा ने कहा कि आदिवासी महिला से जुड़े प्रकरण के बहाने निरपराध परिवारों पर हमला करना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है। वही उत्तराखंड बंगाली महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है। महासभा ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह मलकानगिरी में पीड़ित बंगाली परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो तथा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए जाएं।






















