रंजीत संपादक
मध्य हिमालय में पर्वतीय ढलानों पर लटके अस्थिर ग्लेशियर अब खतरे की घंटी बनते जा रहे हैं। इसी गंभीर मुद्दे पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार समेत कई एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
दरअसल, एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने यह कार्रवाई की। रिपोर्ट में वैज्ञानिक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया गया है कि मध्य हिमालय क्षेत्र में कई ग्लेशियर ढलानों पर अस्थिर स्थिति में हैं, जो कभी भी टूटकर बड़े हिमस्खलन का कारण बन सकते हैं। इसका सीधा खतरा उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और संवेदनशील क्षेत्रों—बदरीनाथ, माणा और हनुमान चट्टी—पर मंडरा रहा है।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य की पीठ ने 24 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड और राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान को प्रतिवादी बनाया है।
पीठ ने कहा कि उपग्रह चित्रों और डिजिटल एलिवेशन मॉडल के जरिए वैज्ञानिकों ने हिमस्खलन के संभावित दायरे और उसके प्रभाव का आकलन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ये ग्लेशियर टूटते हैं तो निचले इलाकों में भारी तबाही मच सकती है।
अब सभी संबंधित एजेंसियों से इस मामले में विस्तृत जवाब मांगा गया है, ताकि संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके।





















